Top 6 Acchi Acchi Kahaniyan in Hindi | अच्छी कहानियाँ हिंदी में

दोस्तों आज हम आपके लिए 6 acchi acchi kahaniyan लेकर आये हैं, अच्छी कहानियां एक रूपांतरित अनुभव प्रदान करती हैं, जो पाठकों को सोचने और संवेदनशील होने के लिए प्रेरित करती हैं। हमारे द्वारा पेश की गयी सभी Acchi Kahaniyan हिंदी भाषा में आपके सामने प्रस्तुत की गयी हैं

ये सभी कहानियां आपको मोह लेंगी क्योंकि हमने इन्हे हमारे सिक्छक ने अपने 10 साल के अनुभव द्वारा लिखा है, तो चलिए इन अच्छी अच्छी कहानियो को पढ़ने का आनंद लेते हैं.

किस्मत की लकीरें – Acchi Kahaniyan in Hindi, 1

acchi acchi kahaniyan – kismat ki lakir

मेरी एक सहेली थी।उसका नाम प्रेरणा था। वो और में एक साथ ही स्कूल जाते थे।साथ साथ पढ़ना लिखना टीचर को याद करके सुनना और साथ बैठ कर खाना खाना । प्रेरणा के पापाजी आर्मी में थे। उस समय उनकी तनख्वा केवल तीन हजार रूपए प्रति माह थी।जिसमें उनको बिजली का बिल राशन बच्चो की फीस मकान का किराया दादी मां की दवाई सब्जी गैस सिलेंडर सभी कुछ करना पड़ता था। ऊपर से वो चार बहन थी उनकी मम्मी को उनकी शादी की चिंता भी रहती थी।

दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी थी । उनके बाद अब प्रेरणा की शादी की बारी आई । बी ए फाइनल करने के बाद प्रेरणा की भी शादी हो गई। प्रेरणा का पति एक प्राइवेट स्कूल मे अध्यापक था । प्रेरणा भी पढ़ाई में अच्छी थी। लेकिन वह सबसे छोटी बहू थी। इसलिए उसको घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी।वह घर का ही काम किया करती थी । उसकी शादी एक बहुत ही बड़े परिवार में हुई थी। लेकिन सब अपना कारोबार अलग अलग किया करते थे।

केवल प्रेरणा का पति ही ऐसा था जो प्राइवेट स्कूल में में पढ़ाने जाता था ।उसकी तनख्व भी काम ही थी। इसीलिए उसका काम हल्का था । बाकी उसके जेठ जेठानी देवर देवरानी सबके अच्छे काम थे।वो अपना निजि कारोबार किया करते थे। कुछ समय बाद प्रेरणा को एक बेटा और एक बेटी हुए।बेटे का नाम गौरव और बेटी का नाम पूर्वी था । बचपन से ही उसके बेटे के दिल में छेद था । बेटी स्वस्थ थी। प्रेरणा का पति चुप चाप रहता था उसको काम ही बोलना पसंद था ।

एक दिन अचानक प्रेरणा के पति को तेज दर्द हुआ।प्रेरणा उसको डॉक्टर के पास लेकर गई ।डॉक्टर ने कहा की तुम्हारे पति को ब्लड कैंसर है और अब ये कुछ ही दिनो के मेहमान है।यह बात सुनकर उसके पैरो तले की जमीन खिसक गई।अब उस बेचारी को कुछ समझ नही आ रहा था । की वो क्या करे दो बच्चे उनमें से भी एक बीमार । उसके देवर देवरानी और सास को जब यह पता चला तो वह अपने भाई को दूसरे डॉक्टर के पास लेकर गई। लेकिन उस डॉक्टर ने भी यही बोला की आपके भाई की बीमारी अब लास्ट स्टेज पर है ।

अब आप इनकी सेवा कर लिजिए। डॉक्टर के यह से आने के तकरीबन पांच दिन बाद ही प्रेरणा के पति की मृत्यु हो गई। उसके पति के जाने के बाद अब उसकी सास ही उसके साथ रह कर घर का खर्च चलाने में उसकी मदद करती थी।पति की मृत्यु के एक साल बाद उसकी सास बी चल बसी।अब उसका कोई सहारा नही था। पहले तो वह कुछ दिन ससुराल में रही फिर उसकी एक पड़ोसन बोली अभी तेरी उम्र ही क्या है । तू अकेले यहां कैसे रहेगी ।

फिर उसने सोचा की बात भी ठीक है लोग पता नही क्या क्या बाते बनाए ।यह सब सोच कर वह अपने पापा के घर आ गई। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन फिर उसकी भाभी उसको ताने मारने लगी की इसको और इसके बच्चो को हम कब तक रखे ।प्रेरणा को यह सुनकर बड़ा दुख हुआ।उसने एक अस्पताल में नर्स की नौकरी करनी शुरू कर दी। एक दिन प्रेरणा को जब मैने वहा देखा तो उसको देख कर मुझको लगा क्या यह वहीं प्रेरणा है ।

जिसको में जानती थी।उसने मुझको देखा और मैने उसको देखा दोनो ने एक दूसरे को गले से लगा लिया।फिर उसने मुझको सारी बात बताई । मेरे पड़ोस मैं एक लड़का रहता था उसकी बीवी का देहांत हो चुका था।और बच्चे भी नहीं थे ।लेकिन प्रेरणा और उस लड़के की कास्ट अलग अलग थी।मैने प्रेरणे के पापा से बात की ओर बोला अंकल जी लड़का अच्छा है।आप प्रेरण की शादी आलोक कर दीजिए।वह प्रेरणा के दोनो बच्चो को भी अपने बच्चो की तरह पालेगा ।

उनका और प्रेरणा का पूरा ध्यान रखेगा। अंकल जी ने मुझे बताया की बेटा रिश्ते तो और भी बहुत है मगर कोई भी लड़के को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है। आज तुमने बताया है की वो दोनो बच्चो को एक्सेप्ट करने को तैयार है ।तो ठीक है मैं कल ही जाकर उस लड़के और उसके परिवार वालों से मिलता हूं।

और फिर उन्होंने मेरा कहना मान लिया । प्रेरणा की शादी उस अदर कास्ट लड़के के साथ करने की मंजूरी दे दी । वह लड़का उम्र में प्रेरण से बड़ा था। लेकिन नेक दिल और काफी समझदार था ।उसने शादी से दो दिन पहले ही प्रेरणा के दोनो बच्चो के नाम एक एक लाख रुपए की एफडी करा दी। कुछ दिनों बाद प्रेरणा को एक बेटा और हुआ ।जो की बहुत ही सुंदर था। प्रेरणा के तीन बच्चे हो गए।प्रेरणा का छोटा बेटा और बेटी पढ़ाई में काफी समझदार है । वो अपनी क्लास में हमेशा प्रथम आते है।अब प्रेरणा मेरे ही पड़ोस में अपने पति और बच्चो के साथ खुशी से जीवन यापन कर रही है।

नेकी का परिणाम – Acchi Acchi Khaniya हिंदी में, 2

Acchi Acchi Khaniya - neki ka parinam
acchi acchi kahaniya – neki ka parinam, 2

एक गांव मे गोपी मदन चंदन और केशव नाम के चार व्यक्ति रहते थे।केशव और गोपी एक दूसरे से बहुत नफरत करते थे।मदन और चंदन दोनो की अच्छी मित्रता थी।मदन और चंदन की मित्रता की गांव के सब लोग मिसाल देते थे।एक दिन केशव शहर गया हुए था ।वह अपने खेत में गन्ने की फसल बोने के लिए खाद बीज और कीटनाशक दवाएं लेकर आया।तभी गोपी ने देखा की केशव गन्ने की फसल बोने की तैयारी कर रहा है।गोपी केशव की फसल को बोने से पहले ही हानि पहुंचाने की योजना बनाने लगा ।

किंतु चंदन और मदन की मित्रता को देख कर। उसके मन में तरह तरह के विचार आने लगे ।उसकी अंतरात्मा ने उसको कचोटा और ललकार दिया। चंदन और मदन एक दूसरे के बिना खाना भी नही खटीक साथ मिलकर अपनी खेती करते है अच्छी पैदावार लेते है उनके परिवार में कितनी खुशहाली है। बच्चे अच्छे से अपनी पढ़ाई कर रहे है। अपने माता पिता की सेवा करते है उनका कहना मानते है । उनका घर । घर नही मानो स्वर्ग है।

यह सारी बातें सोच कर उसके मन में यह विचार आया ।किसी का बुरा करके तुझको क्या मिलेगा । इस तरह के द्वअंध उसके मन को कचोटने लगे ।उसके मन में जो भी नफरत की भावना थी वह अपने आप न जाने कहा गायब हो गई । एक दिन अचानक गोपी की तबियत बिगड़ गई। उसकी पत्नी दौड़ते हुए केशव के पास गई। केशव उसको तुरंत एंबुलेंस में डाल कर अस्पताल को ले गया । डॉक्टर ने बताया की गोपी को दिल का दौरा पड़ा है।

यह सुनकर उसकी बीवी कमला रोने लगी ।केशव ने उसको धीरज बंधाते हुए कहा भगवान पर भरोसा रखो गोपी को कुछ नही होगा ।फिर थोड़ी देर के बाद डॉक्टर आया । डॉक्टर ने कहा गोपी के दिल का ऑपरेशन करना पड़ेगा तुम लोग पैसों का इंतजाम कर लिजिए हम ऑपरेशन की तैयारी करते है। केशव अपने घर गया उसने अपना ट्रैक्टर बैच दिया और तुरंत पैसे लेकर अस्पताल में पहूच गया । डॉक्टर ऑपरेशन करने लगे कुछ समय ऑपरेशन हो गया।दो दिन बाद गोपी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई ।

गोपी घर आया तो उसने केशव को गले लगाकर कहा मेरे भाई आज अगर तू न होता तो मेरी जान चली जाती।तेरा बहुत उपकार है मुझ पर ।यह बात सुनके केशव बोला नही मेरे भाई यह तो मेरा फर्ज था । अब तू आराम कर अपने दिल और दिमाग को ज्यादा कष्ट मत दे । यह कह कर केशव वहा से चला गया ।उसके जाने के कुछ देर बाद ही ।गोपी को फिर से हार्ट अटैक आ गया। गोपी को । इस बार केशव मदन और चंदन तीनों मिलकर डॉक्टर के पास लेकर गए ।

किंतु उसने रास्ते में ही अपने प्राण त्याग दिए। वह गोपी के मृत शरीर को उसके घर लेकर आए।तो गोपी की बीवी कमला के होस उड़ गए। वह गोपी को देख कर जमीन पर चक्कर खा कर गिर गई। गोपी के बीवी और बच्चो को रोता बिलकता देख सभी लोगो में सन्नाटा सा छा गया । गोपी को शमसान घाट लेजाकर उसकी चिता जलाकर उसको अंतिम विदाई दी गई। गोपी का बड़ा बेटा जय ये सब बड़े ध्यान से देख रहा था। अब उसके सिर से पिता का साया छीन गया ।

गोपी के बड़े बेटे की आयु केवल आठ साल की थी । और एक छोटी बहन भी थी जिसकी आयु पांच साल थी।अब गोपी के जाने के बाद उसकी बीवी चंदन और मदन के खेतो पर जाकर काम करने लगी।एक दिन कमला गेंहू काट रही थी।अचानक से मौसम खराब हो गया पहले तेज हवा चली फिर भयंकर आंधी आ गई। जैसे ही कमला घर जाने को तैयार हुई तभी एक बड़ा सा पेड़ उसके सिर के ऊपर आकार गीर गया।और वह उसके नीचे दबकर मर गई।

आंधी के शांत होने के बाद जब उसका बेटा जय वहा आया। तो उसने देखा उसकी मां पेड़ के नीचे दब कर मर चुकी थी।वह रोते हुए ।चंदन मदन और केशव को पुकारते हुए बोला काका मेरा मां ।को देखो ना क्या हो गया है। सारे गांव के लोग जमा हो गए। सब ने देखा की कमला तो अब इस दुनिया से जा चुकी है।अब दोनो बच्चे अनाथ हो गए। उनके सिर से माता पिता दोनो का साया छीन चुका था।

उस दुर्घटना के बाद जय और उसकी बहन की सारी जिम्मेदारी केशव चंदन और मदन ने लेली उन दोनों बच्चो को अच्छे स्कूल में दाखला दिलवाया पढ़ लिख कर जय ने यूपीएससी सिविल परीक्षा पास कर ली ।और और अपने जिले का अधिकारी बन गया। केशव मदन और चंदन की मेहनत और जय की कामयाब होने की लगन रंग लाई । अब जय ने अपनी कमाई से। गांव मे एक अनाथ आश्रम बनवाया और एक स्कूल बनावाय जिससे सभी बच्चे फ्री में पढ़ाई कर सके।

त्याग का फल – Acchi Khaniyan in Hindi, 3

Acchi Acchi Khaniya - tyag ka fal
acchi acchi kahaniyan – tyaag ka fal, 3

साक्षी एक बड़ी ही समझदार और संस्कारी लड़की थी। बचपन में ही उसकी मां रविता का देहांत हो गया था ।तब साक्षी केवल आठ साल की ही थी।जब उसकी मां का साया उसके सिर से छीन गया था।और उसका एक छोटा भाई भी था । जिसका नाम रोनिक था।जब साक्षी की मां रविता का देहांत हुए था। तब रोनिक की आयु केवल तीन साल की थी। साक्षी ने रोनिक को इस तरह प्यार से रखा ।जैसे एक मां अपने बच्चे को प्यार से रखती है ।

जब रोनिक चार साल का हो गया था ।तो साक्षी ने उसको स्कूल भेजना शुरू कर दिया था । रोनिक प्रीतिदिन स्कूल जाने लगा । और सारिका भी उसको घर पर पढ़ती व उसका होमवर्क कराती थी।धीरे धीरे समय बीतता गया और रोनिक दसवीं कक्षा में आ गया था।वह अपनी दीदी के पास बैठ कर पढ़ाई किया करता था। वह पढ़ने में बहुत अच्छा था। स्कूल के सारे टीचर भी उसकी तारीफ किया करते थी । क्योंकि वह सभी टीचरों का सम्मान किया करता था।

अब रोणिक की बोर्ड की परीक्षा शुरू होने वाली थी। रोनिक को यह सोच कर डर लग रहा था । कही मैं परीक्षा से निकल न दिया जाऊ । क्योंकि रोनिक की परीक्षा फीस जमा नहीं हो पाई थी।उसकी दीदी को पिछले दो महीनों से बुखार आ रहा था ।और वो काम पर नही जा रही थी।रोनिक अपनी दीदी को देख कर रोने लगा दीदी आप ठीक तो हो ना आपको क्या हुआ ।आपका फीवर उतरने का नाम ही नही ले रहा है।आप किसी अच्छे डॉक्टर से दवाई क्यों नही ले लेती।

साक्षी बोली में ठीक हू तुम एक काम करो हाथ मुंह धोकर खाना खा लो।और हा कल तुम अपनी फीस जमा कर देना पुनीत चाचा आए थे वो तुम्हारी फीस जमा करने के लिए मुझको पैसे देकर गए थे ।रोनिक बोला नही दीदी आप उन पैसों से अपनी दवाई ले आना ।अरे नही नही मे ठीक हू।तुम चिंता मत करो।देखो मैं थोड़ा बहुत कम भी कर रही हू और चल फिर भी लेती हू । कमजोरी है जाते जाते ही जाएगी।रोनिक अगले दिन सुबह स्कूल जाता हैं और अपनी फीस जमा कर देता है।रोनिक की परीक्षा अच्छे से निपट जाती हैं।

अब रिजल्ट की बारी आती है। रोनिक अपनी दीदी से बोला दीदी आज मेरा रिजल्ट घोषित कर दिया गया है।और मैने स्कूल ही नहीं पूरे जिले को टॉप किया है।रोनिक की दीदी की खुशी का ठिकाना न रहा।वह बहुत खुश थी।और खुशी से नाचने लगी।कमजोरी और बुखार से पीड़ित रोनिक की बहन कुछ देर बाद जमीन पर गिर गई। रोनिक घबरा गया और डॉक्टर को बुलाकर लाया डॉक्टर ने जांच की ।फिर उसके बाद रिपोर्ट आई ।तो पता चला रोनिक की बहन को ब्लड कैंसर था।यह बात सुनकर रोनिक के पैरो तले की जमीन खिसक गई।उसकी दीदी ही उसकी दुनिया थी। उसने डॉक्टर से पूछा सर मेरी दीदी ठीक तो हो जायेगी।

डॉक्टर कुछ देर चुप रहा और फिर बोला हा हा बेटा क्यो नहीं।ठीक हो जायेगी। लेकिन साक्षी के पास अब ज्यादा समय नहीं था।उसकी जिंदगी के चंद ही दिन बचे थे । लेकिन साक्षी के चहरे पर मुस्कान थी। उसको अपने जाने का दुख नही था।बल्कि इस बात की खुशी थी ।उसका भाई रोनिक अब एक काबिल इंसान बनने की सीडी पर चढ़ गया है।उसके दिल मे अब किसी और बात की चिंता नहीं थी।और वह खुशी खुशी परमात्मा में विलीन हो गई।इस दुनिया से दूर दूसरे जहा मे जा चुकी थीं।रोनिक को अपनी दीदी की मौत का बहुत सदमा लगा। लेकिन उसने अपने आप को संभाल लिया।और एक काबिल डॉक्टर बन गया ताकि इस बीमारी से कोई भाई अपनी बहन से दूर न हो

दूसरो के लिए अपने आप को भूल जाना – Acchi Acchi Khaniyan Hindi, 4

acchi acchi kahaniyan- dushro ke liye apne aap ko bhul jana
acchi acchi kahaniyan- dushro ke liye apne aap ko bhul jana, 4

रात के तकरीबन ग्याहरा बजे थे । तभी किसी बच्चे के जोर जोर से रोने की आवाज सुनाई दी। मैं बिस्तर से उठ कर बैठ गई। और बोली अरे यह किस का बच्चा रो रहा है।फिर मैं कमरे से बाहर निकली तो आस पास कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आया ।मेरे कमरे से बाहर निकलने के बाद बच्चे के रोने की आवाज भी आनी बंद हो गई।मुझको लगा की शायद ये मेरी वहम था ।मैने नींद मे जरूर कोई सपना देखा है। मै उसके बाद अपने कमरे मे जा कर सौ गई।

जैसे ही मेरी आंख लगी तो मुझको फिर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।मैंने उस आवाज को अनसुना कर दिया । और अपने कानो पर हाथ रख कर सौ गई ।लेकिन वो आवाज तेज होती गई। और मुझको उठना ही पड़ा । मैं दोबारा बिस्तर से उठ कर बाहर गई । लेकिन इस बार मेरे बिस्तर से उठने के बाद भी आवाज सुनाई दे रही थी। मैं उस आवाज को सुनते सुनते घर से बाहर निकल गई और काफी दूर तक पहुच गई।

फिर मुझको याद आया मैं एक चुड़ैल की कहानी पढ़ रही थी कही सच मैं किसी चुड़ैल का पीछा तो नही कर रही हू।जैसे ही मुझको वह कहानी याद आई ।मैं पसीना पसीना हो गई।और मेरे कदम पीछे खींचने लगे। मैं इतना डर गई की मुझको ये तक नही सूझ रहा था की मै किस रास्ते से आई थीं।बच्चे के रोने की आवाज तेज हो गई थी । ऐसा लग रहा था। जैसे मैं बच्चे के एक दम करीब हु ।लेकिन डर के मारे मेरी हवा खुसक थी ।

अब मेरे दो मन हो रहे थे।एक अपने घर को वापस जाने का दूसरा बच्चे को देखने का की वह बच्चा कौन है। और साथ ही साथ मेरे दिल से धक धक कर के यह भी आवाज सुनाई दे रही थी।की घर वापस लौट चलू। कही मैं किसी चुड़ैल का शिकार न बन जाऊ। लेकिन उस बच्चे की आवाज ने मेरे मन को मोह लिया था । अब मैंने हनुमान जी का नाम लेकर अपना पूरा मन बना लिया चाहे जो भी हो।अब मै उस बच्चे के पास जाकर ही रहूंगी ।

मैने मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ किया।और आगे बढ़ गई। तभी मेरी नज़र एक पेड़ के नीचे रखी एक टोकरी पर गई जिसमें लाल कपड़ा बंधा हुआ था।मैं सहम कर उसके पास गई।और डरते हुए उस कपड़े को हटाया। तो जो मैने देखा उसको देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उस टोकरी मैं एक नवजात बच्ची थे जो बहुत ही सुन्दर थी।उसको देख कर मेरी आंखो में आंसु आ गई। मैने उसको अपनी गोद में उठा लिया और उसको चुप कराने लगी।

मेरी गोद में आने के कुछ देर बाद ही वह चुप हो गई।अब मै उसको गोदी मे लेकर यह सोचने लगी की इसको कहा लेकर जाऊ। मेरी मम्मी पापा जब मुझसे पूछेंगे की यह कौन है।तुम्हारे पास कहा से आई ।तो मैं क्या जवाब दूंगी।मेरे समझ में कुछ भी नही आ रहा था की मै क्या करू।फिर जब मैने उस बच्ची की तरफ देखा तो उसको देख कर मुझे दया आ गई।और फिर मैं उसको अपने घर लेकर आ गई।रात का एक बज चुका था।मैं जैसे ही घर वापस आई मेरे मम्मी पापा और दो छोटी बहन घर के बाहर ही खड़े थे ।

उनको देख कर ऐसा लग रहा था।जैसे वो मुझको ही ढूंढने निकल रहे हो। मैं जैसे ही घर पहुंची मेरे मम्मी पापा ने मुझे से पूछा तुम इतनी रात को कहा गईं थीं।और ये बच्चा किसका हैं।मैने अपनी मम्मी पापा को सारी बात बताई।तभी मेरी मम्मी और पापा बोले इसको जहा से लेकर आई हो वही पर छोड़ कर आओ। सुबह जब दिन निकलेगा सब लोग पूछेंगे की बच्ची किसकी है। तो हम क्या जवाब देंगे। पता नही लोग क्या क्या बाते करेंगे तुम्हारे और इस बच्ची के बारे में।

मैं पहले उनकी बात सुनती रही।फिर कुछ देर बाद मैंने कहा नही मम्मी पापा मैं इसको अपने पास रखूंगी ।तभी मेरी मम्मी बोली देख तेरी दो दो बहने है।अब तू इसको और ले आई। लोग यही सोचेंगे की कही यह तेरी ही नाजायज बच्ची हैं । मम्मी ने मुझको तरह तरह की बाते व तर्क देने लगी । मैने मम्मी से साफ इंकार कर दिया की अब आप या कोई और कुछ भी बोले। मैं इस बच्ची को नही छोड़ने वाली ।मेरी मम्मी पापा ने मुझे रात में ही घर से निकले जाने को कहा।

या तो तुम इस घर में रहोगी या ये बच्ची अब फैसला तुम्हारे हाथ में है। मैने बिना कुछ बोले अपने कपड़े को एक बैग में रखा और घर से निकल गई।बिना कुछ सोचे समझे घर से बाहर निकल तो गई लेकिन अब मेरी समझ में कुछ नही आ रहा था । की मै क्या करू। फिर मैंने धैर्य से काम लिया ।और एक स्कूल में गई ।वहा जाकर और दूसरो की अपेक्षा कम पैसे में साफ सफाई का काम करने के लिए तैयार हो गई।और छोटे छोटे बच्चे को ट्यूशन भी पढ़ाने लगी ।इस तरह से अब में अपना और उस बच्ची का पालन पोषण कर रही हू।

मस्ती भरे दिन – Acchi Kahani in Hindi, 5

acchi acchi kahaniyan - masti bhare din
Masti Bhare Din – Acchi kahaniyan in hindi, 5

चिनोरा गांव मे एक बुंदू नाम का दर्जी रहता था। वह बड़ा हसमुख (हंसी मजाक) करने वाला था । उसकी एक बीवी और आठ बच्चे थे ।वह बहुत गरीब था ।लेकिन फिर भी खुश था ।वह अपनी जीविका चलाने के लिए कठिन परिश्रम और बहुत ज्यादा मेहनत करता था। गांव के सभी लोग उसी से अपने कपड़े सिलवाया करते थे ।

वह जब भी कोई कपड़ा सिलता तो उसको दोबारा जरूर उधेरेना पड़ता था कभी भी एक बार में सिल हुए उसके कपड़े सही नही बैठते थे ।एक दिन बुंदू ने रमेश का कुर्ता सिला तो वह बहुत खुश हुआ और बोला की आज मेरा यह पहला कुर्ता जो एक बार में ही सिल के तैयार कर दिया है बिना उधेरे।जैसे ही उसने कुर्ता सीधा करके रमेश को दिया उसने पहना तो उसकी एक बाजू ऊपर की तरफ और दूसरी नीचे की तरफ जुड़ी थी ।

वह बोला एक कुर्ता आज पहली बार सही सिला था इसकी भी एक बाजू ऊपर और नीचे हो गई अल्ला ने मुझको पता नही सबसे अलग ही बनाया है। तभी सकरू ने बुंदू को आवाज लगाई। बुंदू चलो आज पुलिया पर मौलाना साहब आए हैं खुदा के बारे मैं कुछ जिक्र होगा सुनके आते हैं ।बुंदू कहने लगा चलो भैया।चलते हैं ।उसका मन उदास था ।आज तक हमारा कोई काम सही तो हुए नही है।तुम कह रहे हो तो चलता हु ।

मौलाना साहब ने बताया की जो भी बंदा खुदा का कर्म करेगा रमजान के पावन रोजे रखेगा सच्चे दिल से नमाज़ अदा करेगा खुदा के यहा उसको बहत्तर हुरे मिलेगी ।यह बात सुनके बुंदू वहा से चल दिया ।सब लोग बोले अरे भाई कहा चल दिए ।पूरी बात तो सुनो । बुंदू बोला अरे भैया यहां तो इतनी गरीबी मे एक बेगम की ही सलवार ना सिलवाई जारी वही ऊधरी फिरे बहत्तर की कौन बनवावेगा।

मै तो बिना हुर के ही ठीक हू। इस लिए कर्म करो हूर की इच्छा मत करो । हुरे मिलने से क्या लाभ होगा इस संसार से मुक्ति होकर मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करो चाहे अल्ला से करो या ईश्वर से करो

झूठ का परिणाम – Acchi Acchi Khaniyan, 6

acchi acchi kahaniyan-  jhoot ka parinaam
jhoot ka parinaam- Acchi acchi kahaniyan, 6

एक गांव में एक किसान और उसकी बीवी रहती थी ।किसान सुबह ही अपने खेतों में चला जाता था ।और अपने खेत जोतने लग जाता था। वह सारे दिन बहुत मेहनत किया करता था ।उसकी बीवी घर का काम करती थी । किसान के घर पर एक बड़ी सी कोठी में धान रखा जाता था ।किसान की बीवी किसान के जाने के बाद ।उस कोठी से धान निकलती और उसको ओखली मैं कुटकर उसके चावल निकल लेती थी और उस मे घी डाल कर खा लिया करती थी ।

ऐसा करते करते कुछ दिन बाद वो सारे धान भुस्सी हो गए ।सारे चावल खत्म हो गए। अब किसान की बीवी को यह चिन्ता हो गई की किसान धान के बारे मैं पूछेगा तो क्या जवाब दूंगी। तो उसने एक योजना बनाई।उसने अपने सर पर एक काली हंडिया रखी मुंह काला किया। और खेत पर चली गई ।वहा जा कर किसान से बोली की मैं हू काली चंडिका मेरे सर पर धरी हंडिका तुझको खाऊं तेरे बच्चो को खाऊं तेरी कोठी के धान भुस्सी कर जाऊ ।

यह सुनकर किसान डर गया और बोला देवी तुम कौन हो। मुझको भी मत खाओ और न मेरे बीवी बच्चों को बेसक मेरी कोठी के धान भुस्सी कर दो।किसान की यह बात सुनकर उसकी बीवी घर वापस लौट आई। फिर कुछ देर बाद किसान घर पर आया तो उसने अपनी बीवी को खेत वाली घटना के बारे मैं बताया । की हे भाग्यवान आज तो मेरी जान ही बची है बड़ी मुस्किल से बच के आया हु ।आज खेत पर एक चुड़ैल आ गई थी और मुझसे कहने लगी ।की तुझको खाऊ तेरे बच्चो को खाऊं तेरी कोठी के धान भुस्सी कर जाऊ।

किसान की बीवी बोली फिर तुमने क्या बोला जी।किसान ने कहा बोलता क्या मैने कह दिया की मत तो मुझको खाओ और ना ही मेरे बच्चो को बेसक मेरी कोठी के धान भुस्सी कर दो ।अब जरा तुम जाकर देखो तो कही सच मैं ही हमारी कोठी के धान भुस्सी तो नही हो गए है।किसान की बीवी जब जा कर देखती है तो उनकी कोठा मे केवल भुस्सी ही रहती है।किसान को यह सब देख कर बड़ा दुख होता है। कि उसने जो बोला सौ कर दिया।फिर किसान की बीवी उसको समझाने लगती है की कोई बात नही है ।

जी हमारी जान तो बच गई ।धान भुस्सी हो गया कोई बड़ी बात नही है।पहले तो अपनी जान प्यारी है ।धान तो फिर भी पैदा कर लेंगे। अगर वह चुड़ैल हमको मार देती तो क्या होता ।कुछ दिनों के बाद फिर धान की फसल कटती है। किसान फिर से उसी कोठी मैं धान को भर देता है।उसकी बीवी फिर से ऐसा ही करती है। धान को कूट कर उससे चावल निकाल के भुस्सी को कोठी में ही डाल देती है। ऐसा करते करते जब काफी दिन हो गए ।तो सारे चावल फिर से खत्म हो गए ।

अब किसान की बीवी ने फिर से अपनी पहले वाली तरकीब को दोहराया ।वह पहले की तरह अपने सर पर एक काला हंडा रख के काला मुंह कर के किसान के हल और बैल के सामने खड़ी हो कर बोली मै हु काली चंडिका मेरे सिर पर धरी हंडका तुझे खाऊं तेरे बच्चो को खाऊं तेरी कोठी के धान भुस्सी कर जाऊ।किसान फिर से डर गया ।

तभी अचानक बारिश आ गई और किसान की बीवी की सारी कालिक बारिश के पानी से धूल गई।जब किसान ने उसको देखा तो उसके होश उड़ गए।उसने एक खल्वा ( मोटा डंडा )लिया और अपनी बीवी की जम कर पिटाई की । की तूने मुझको पागल बना दिया इस तरह बार बार झूठ बोलना किसान की बीवी को भारी पड़ गया।

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Acchi Acchi Kahaniyan क्या हैं

च्छी अच्छी कहानियां विभिन्न प्रकार की होती हैं और विभिन्न विषयों पर आधारित होती हैं, हर एक व्यक्ति की पसंद अलग होती है एक अच्छी कहानी वो होती है जो सबके मनको भये

क्या Acchi Kahaniyan फायदेमंद हैं

जी हां, अच्छी कहानियां फायदेमंद होती हैं और इनके कई तरह के लाभ होते हैं, अच्छी कहानियां मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत होती हैं, भाषा और भावना का संवर्धन करती हैं। व्यक्ति इन्हें पढ़कर भाषा का उच्च स्तर प्राप्त करता है

सबसे Acchi Kahaniyan कोनसी है

अच्छी कहानियां सुविधा और विचारशीलता के मामले में व्यक्ति के पसंद के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। किसी को किसी विशेष प्रकार की कहानी अधिक पसंद होती है तो दूसरे को कुछ अन्य प्रकार की, अच्छी कहानियों की विशेषता यह है कि वे व्यक्ति की भावनाओं और भाषा की क्षमता को सतह बनाती हैं

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